महामारी ( Epidemics ) किसी बीमारी का अचानक ही वृहत रूप में किसी आबादी को
प्रभावित करना महामारी कहलाता है । महामारी के अंग्रेजी रूपान्तरण एपिडेमिक ' का शाब्दिक अर्थ ' लोगों पर ' ( upon the people
) है । पहले महामारी शब्द का
प्रयोग संक्रामक रोगों के लिए किया जाता था लेकिन वर्तमान में इसका उपयोग मुख्य
गैर - संक्रामक रोगों के लिए भी किया जाता है , जैसे - एड्स , कैंसर , इत्यादि
। मलेरिया बड़ी माता / चेचक
( Small Pox ) हैजा , डेंगू , टायफायड , टी.बी. , स्वाइन फ्लू , इत्यादि यहां की अन्य महामारियां हैं । महामारी का फैलाव
महामारी कई प्रकार से फैलती है ।
उनके कुछ फैलाव के तरीके
निम्नलिखित हैं :
1. प्रत्यक्ष सम्पर्क से , उदाहरण के लिए जब कोई रोगी खाँसता या छींकता है तो
बिन्दुकों ( Droplets ) से यह
बीमारी साथ में रहने वाले को भी लग जाती हैं ।
2. दूषित जल तथा खाद्य सामग्री
से ।
3. सन्धिपाद ( Arthropods
) के द्वारा - ये इन बीमारियों के जीवाणु के भौतिकीय संवाहक ( Mechanical
Carrieer ) हैं जैसा कि पेचिश तथा हैजा में होता है । खून चूसने वाले
सन्धिपाद ( जैसे मछर ) अधिक प्रभावी संवाहक हैं ।
महामारी के फैलाव को प्रभावित करने वाले कारक मौसम तथा
जलवायु के अतिरिक्त महामारी के फैलाव तथा तीव्रता को प्रभावित करने वाले कारक
निम्नलिखित हैं :
( 1 ) नृजातियता ( Ethnicity
)
( 2 ) आयु तथा लिंग संयोजन
( 3 ) साक्षरता
तथा शिक्षा
( 4 ) व्यवसाय
एवं जीवन शैली
( 5 ) परिवार
का आकार तथा जनसंकुलन की मात्रा
( 6 ) आवासीय
स्थान
( 7 ) खान -
पान का तरीका
( 8 ) जीवन स्तर
( 9 ) धूम्रपान
तथा शराब का सेवन , एवं
( 10 ) जानवरों
तथा पक्षियों के साथ संबंध ।
आपतन वक्र ( Incidence Curve ) विभिन्न महामारी का आपतन वक्र एकरूप इस अर्थ में होता है कि
महामारी से प्रभावित लोगों ( रोगी ) की संख्या में वृद्धि इसके घटने के मामले से
अधिक तीव्र होती है । महामारी में रोगियों की संख्या तीव्र गति से बढ़ती है तथा
बहुत मन्द गति से समाप्त होती है ।
महामारी (pandemic) और
स्थानीय महामारी (Epidemic) में
फर्क
वह बीमारी जो दुनिया भर में फैल जाती है उसे
पैनडेमिक या महामारी कहते हैं जबकि एपिडेमिक किसी एक देश, राज्य, क्षेत्र
या सीमा तक सीमित होती है।


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