भोजन के अवयव ( Components of food ) 


भोजन को तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जा सकता

1. ऊर्जा प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थ

2. शरीर निर्माण करने वाले खाद्य पदार्थ

3. रोधी क्षमता वाले खाद्य पदार्थ

भोजन के अवयव ( Components of food ) :

 भोजन के प्रमुख अवयव निम्नलिखित हैं- 

 1. कार्बोहाइड्रेट ( Carbohydrates ) 

 2 . प्रोटीन ( Proteins ) 

 3. वसा ( Fats ) 

 4.खनिज लवण ( Mineral Salts ) 

 5. विटामिन ( Vitamins ) तथा

 6. जल ( Water ) |

1. कार्बोहाइड्रेट ( Carbohydrate ) : कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा प्रदान करने वाले पदार्थों का वर्ग है । ये रासायनिक यौगिक होते हैं जिनमें कार्बन , हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन होते हैं । कार्बोहाइड्रेट कार्बनिक यौगिक होते हैं जो कि पचने के पश्चात ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाते हैं और ग्लूकोज ऑक्सीजन के द्वारा ऑक्सीकृत होकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं । कार्बोहाइड्रेट में कार्बन , हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन 1 : 2 : 1 के अनुपात में होता है । इनका आधारभूत सूत्र ( CH , O ) , होता है । कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है । शरीर की कुल ऊर्जा आवश्यकता की 50-79 % मात्रा की पूर्ति कार्बोहाइड्रेट के द्वारा होती है । 1 ग्राम ग्लूकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण से 4.2 किलो कैलोरी ( kcal ) ऊर्जा प्राप्त होती है ।

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत ( Sources of carbohydrate ) : कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत गेहूँ , चावल , मक्का , ज्वार , बाजरा , जौ , शक्कर , गुड़ , शहद , सूखे फल , अंजीर , दूध , पके फल , आलू , शकरकन्द , चुकन्दर . रसीले फल , गन्ना , शलजम , केला , अरबी , माँस आदि हैं ।

कार्बोहाइड्रेट के प्रकार : कार्बोहाइड्रेट मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं

 ( a ) मोनोसैकेराइडस ( Monosaccharides ) : यह सभी कार्बोहाइड्रेट्स में सबसे अधिक सरल होता है । इसका आधारभूत सूत्र ( CH , O ) , होता है । मोनोसैकेराइड्स के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं ट्रायोस ( Triose ) : जैसे ग्लिसरैल्डिहाइड ( Glyceraldehyde ) टेट्रोस ( Tetrose ) : जैसे इरेथोस ( Erthrose ) हेक्सोज ( Hexose ) : जैसे ग्लूकोज ( Glucose ) , फ्रक्टोज ( Fructose ) एवं ग्लैक्टोज ( Glactose )

 ( b ) डाइसैकेराइड ( Disaccharides ) : यह मोनोसैकेराइड के दो अणुओं से मिलकर बना होता है । इसका आधारभूत सूत्र CHOT होता है । सुक्रोज ( Sucrose ) , माल्टोज ( Maltose ) , लैक्टोज ( Lactose ) आदि डाइसैकेराइड्स के प्रमुख उदाहरण हैं ।

 ( c ) पॉलीसैकेराइड्स ( Polysaccharides ) : यह अनेक मोनोसैकैराइड्स अणुओं के मिलने से बनता है । इसका आधारभूत सूत्र ( CHO ) होता है । ये जल में अघुलनशील होते हैं । यह मुख्यतः पौधों में पाया जाता है । आवश्यकता पड़ने पर यह 

जल अपघटन द्वारा ग्लूकोज में विघटित हो जाता है । इस प्रकार ये ऊर्जा उत्पादन के लिए ' संग्रहीत ईंधन ' का कार्य करते हैं । मण्ड ( स्टाच ) , ग्लाइकोजेन , सेल्यूलोज , काइटिन ( Chitin ) आदि पॉलीसैकराइड्स के प्रमुख उदाहरण हैं ।

कार्वोहाइड्रेट के कार्य

1. ये शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले मुख्य स्रोत होते हैं ।

2. ये मण्ड के रूप में संचित ईंधन का कार्य करते हैं ।

3 यह वसा में बदलकर संचित भोजन का कार्य करते हैं ।

4 , यह DNA तथा RNA का घटक होता है ।

5. ये शर्कराओं के रूप में ऊर्जा उत्पादन के लिए ईंधन का काम करते हैं ।

6. ये प्रोटीन को शरीर के निर्माणकारी कार्यों के लिए सुरक्षित रखते हैं ।

7. शरीर में वसा के उपयोग के लिए यह अत्यंत आवश्यक है ।

 कार्बोहाइड्रेट की कमी या अधिकता से होने वाले विकार :

कार्बोहाइड्रेट की अधिकता से शरीर के वजन में वृद्धि होती है तथा मोटापा से सम्बन्धित रोग होने की संभावना बढ़ जाती है । कार्बोहाइड्रेट की कमी होने से शरीर का वजन कम हो जाता है , कार्य करने की क्षमता घट जाती है तथा शरीर में ऊर्जा उत्पन्न करने हेतु प्रोटीन प्रयुक्त होने लगती है जिससे यकृत एवं नाड़ी संस्थान के क्रियाकलापों में शिथिलता आ जाती है ।

2. प्रोटीन ( Proteins ) : प्रोटीन अत्यन्त जटिल नाइट्रोजन युक्त पदार्थ है जिसकी रचना लगभग 20 ऐमीनो अम्लों ( Amino acids ) के भिन्न - भिन्न संयोगों से होती है । ये ऐमीनो अम्ल शरीर के उचित पोषण के लिए नितांत ही आवश्यक है ।

प्रोटीन शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम जे . बर्जीलियस ( 1938 ई . ) ने किया था । प्रोटीन मानव शरीर का केवल संरचनात्मक पदार्थ ही नहीं है , वरन यह अन्य प्रकार्यों को भी सम्पन्न करते हैं । मानव शरीर का लगभग 15 % भाग प्रोटीन से बना होता है । प्रोटीन शारीरिक वृद्धि एवं प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है । भोजन में इनकी कमी से शारीरिक एवं मानसिक वृद्धि रुक जाती है । प्रोटीन की कमी से शिशुओं में सूखा रोग ( मेरास्मस ) तथा क्वाशियोरकॉर नामक रोग हो जाता है ।

प्रोटीन के प्रकार प्रोटीन सामान्यतः तीन प्रकार के होते हैं

( a ) सरल प्रोटीन ( Simple protein ) : ऐसे प्रोटीन जो केवल एमीनों अम्लों से बने होते हैं , सरल प्रोटीन कहलाते हैं । जैसे एल्ब्यूमिन , एल्ब्यूमिनाएड , ग्लोब्यूलिन आदि ।

 ( b ) संयुग्मी प्रोटीन ( Conjugated protein ) : ऐसा प्रोटीन जिनका संयोजन प्रोटीन के अतिरिक्त अन्य किसी अणु से भी रहता है , संयुग्मी प्रोटीन कहलाता है । जैसे न्यूक्लियोप्रोटीन , ग्लाइकोप्रोटीन , फॉस्फोप्रोटीन आदि ।

( c ) व्युत्पन्न प्रोटीन ( Derived protein ) : वैसे प्रोटीन जो प्राकृतिक प्रोटीन के आशिक जलीय अपघटन से प्राप्त होते हैं , व्युत्पन्न प्रोटीन कहलाते हैं ।

  प्रोटीन के कार्य

1. यह कोशिकाओं की वृद्धि एवं मरम्मत करनी है ।

2. अनेक जटिल प्रोटीन मेटाबोलिक प्रक्रियाओं में एन्जाइम का कार्य करते हैं ।

3. कुछ प्रोटीन हार्मोन के संश्लेषण में भाग लेते हैं ।

4. हीमोग्लोबिन के रूप में यह शरीर में गैसीय संवहन का कार्य करता है ।

5. यह एन्टीबॉडीज के रूप में शरीर की सुरक्षा करता है ।

एन्जाइम- जैव उप्रेरक , शरीर में लगातार होने वाली जैव रासायनिक प्रक्रियाओं में सहायता करता है

परिवहन प्रोटीन यह  रक्त में विभिन्न पदार्थों को विभिन्न ऊतकों तक ले जाता है ।

सकुचनशील प्रोटीन - यह गति तथा चलन के लिए मांसपेशियों का संकुचन करता है ।

हार्मोन - प्रोटीन हॉर्मोन होते हैं । ये हॉर्मोन अनेक शारीरिक प्रकार्य को नियंत्रित करते हैं ।

संरचनात्मक प्रोटीन - ये कोशिकाओं तथा ऊतकों में संरचनात्मक भाग बनाते हैं ।

रक्षात्मक प्रोटीन - यह संक्रमण से लड़ने में मदद करता है । जैसे प्रतिजैविक ।


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