उस्मान सागर ( Osman Sagar )
यह
हैदराबाद में एक कृत्रिम झील है । हैदराबाद के अंतिम निजाम ( उस्मान अली खान ) के
द्वारा 1920 में मूसी नदी ( Musi River ) पर बाँध बनाकर इस झील को निर्मित किया गया तथा यह हैदराबाद शहर के
लिए पीने के पानी का स्रोत है । ' सागर महल '
नाम का एक गेस्ट हाउस जो इस झील का एक सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करता है
चूर्व में निज़ाम का ग्रीष्मकालीन सैरगाह था तथा अब यह ऐतिहासिक धरोहर है । -
पोनगोंग सो ( Pongong Tso )
लद्दाख
में स्थित यह झील लेह शहर से लगभग पांच घंटे की दूरी पर है । यह मार्ग विश्व के
तीसरे सबसे बड़े दरे ( चांगला दर्रा ) से होकर गुजरता है । झील को देखने के लिए एक
विशेष अनुमति - पत्र की जरूरत होती है । सुरक्षा कारणों से यहाँ नौका - विहार की
इजाजत नहीं दी जाती है । यहाँ एक छोटा होटल तथा पड़ाव - स्थान भी है और निकटवर्ती
गाँवों के घरों में अतिथि कक्ष भी मौजूद है ।
पुलिकट झील ( Pulicat Lake )
यह कोरोमण्डल तट पर दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी
की झील है । यह आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु के सीमा पर स्थित है । श्रीहरिकोटा का
परिध द्वीप इस झील को बंगाल की खाड़ी से अलग करता है । यह झील 60 कि.मी. लम्बी है तथा इसकी चौड़ाई 0.5 से 18
कि.मी. तक परिवर्तनीय है । यह अनेक
स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों का प्राकृतिक वास है । - लगभग 15,000 हंसावर इस झील में प्रतिवर्ष आते हैं । यहाँ कौडिल्ला ( Kingfisher
) , बगुला , चिंगारा
, स्पूनबिल तथा य बत्तख भी पाए जाते हैं ।
पुष्कर झील ( Pushkar Lake )
अजमेर जिले में स्थित यह एक कृत्रिम झील है ।
इस झील का निर्माण 12 वीं सदी में हुआ जब लूनी नदी के नदीशीर्ष पर एक
बाँध बनाया गया । नवम्बर के महीने में कार्तिक पूणि मिा के अवसर पर अनेक
तीर्थयात्री इस झील में पवित्र स्नान के लिए आते हैं ।
रेणुका झील ( Renuka Lake )
हिमाचल
प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित इस झील का नाम देवी रेणुका के नाम पर है । इस जगह
एक चिड़ियाघर तथा " लायन सफारी ( कारवाँ ) भी है । नवम्बर के महीने में यहाँ
वार्षिक मेला लगाता है ।
रूपकुण्ड झील ( Roopkund Lake )
यह झील उत्तराखण्ड में स्थित है तथा इसके
किनारे 600 कंकाल पाए गए हैं । यह निर्जन स्थान लगभग 5030
मीटर की ऊँचाई पर स्थित है । ये कंकाल 1942 में
पाए गए थे । रेडियोकार्बन निर्धारण के अनुसार इन लोगों की जान महामारी में गई थी ।
साँभर झील ( Sambhar Lake )
यह
जयपुर शहर से लगभग 70 कि.मी. दूर पश्चिम की ओर स्थित है तथा भारत की
सबसे बड़ी खारे पानी का झील है । पूर्वी किनारे की ओर यह झील 5 कि.मी. लम्बे बाँध से विभाजित है जो पत्थरों से बनी हुयी है । बाँध
के पूर्व में लवण वाष्पण कुण्ड है , जहाँ लगभग एक
हजार वर्ष पहले से ही नमक का उत्पादन होता आया है । इस झील में जल की गहराई शुष्क
मौसम में कुछ से.मी. से लेकर मानसून 3 मीटर तक रहती है
। सांभर झील को रामसर ( Ramsar ) सूची में
अन्तराष्ट्रीय महत्व की आद्रभूमि के रूप में शामिल किया गया है । हजारों
साइबेरियाई पक्षी जाड़े के मौसम में में इस झील में आते हैं ।
सस्थम कोट्टा झील ( Sasthamkotta Lake )
यह केरल राज्य में मीठे पानी की एक बड़ी झील है
। यह झोल कोल्लम जिले में सस्थमकोटा में स्थित है तथा यह कोल्लम शहर से लगभग 30
कि.मी. दूर है । यह पर्यटकों के लिए एक बड़े आकर्षण का केन्द्र है ।
सतताल अथवा सत्ता ( Sattal )
यह उत्तराखण्ड के कुमाऊ प्रखण्ड में भीमताल शहर
के नजदीक सात शांत झीलों का समूह है । ये झीलें औसत् समुद्री सतह से लगभग 1370
मीटर की ऊंचाई पर स्थित है । ये झीलें प्रवासी पक्षियों के लिए
स्वर्ग है ।
सूरज ताल ( Suraj Tal )
बारालच्छा दरें के शिखर के नीचे स्थित यह एक
अधिक ऊँचाई वाली झोल है । यह समुद्री सतह से लगभग 4980 मीटर
की ऊंचाई पर स्थित है । यह झील भागा नदी का स्रोत है , जो
चेनाब की एक मुख्य सहायक नदी है ।
तवा जलाशय ( Tawa Reservoir )
होशंगाबाद जिले ( म.प्र . ) में नर्मदा नदी पर
स्थित इस जलाशय का निर्माण तवा बाँध के कारण हुआ । यह झील सतपुड़ा राष्ट्रीय
उद्यान तथा बोरी वन्य जीवन अभ्यारण की पश्चिमी सीमा का निर्माण करती है ।
सोंगमो झील ( Tsongmo Lake )
सिक्किम राज्य में गंगटोक से लगभग 40 कि.मी. दूर यह एक हिमानी टार्न ( गिरिताल ) झील है । यह झील अण्डे के आकार ( अण्डाकार ) की है । लगभग 3780 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह झील सर्दी के मौसम में जम जाता है । यह बौद्धधर्मियों तथा हिन्दुओं के लिए एक पवित्र झील है । 1
वीरानम झील ( Veeranam Lake )
यह तमिलनाडु के कुडुलौर जिले में स्थित है । यह चेन्नई से लगभग 235 कि.मी. दूर है । यह उन जलाशयों में से एक है , में जिससे चेन्नई शहर की जलापूर्ति की जाती है ।
वेंबानद झील ( Vembnad Lake ) ( वेंबानद कयाल अथवा वेबानद कोल )
लगभग 200 वर्ग
कि.मी. के क्षेत्रफल में फैली हुयी यह झील केरल की सबसे बड़ा झील है । यह झील
समुद्री सतह पर है तथा अरब सागर से एक संकीर्ण परिध द्वीप द्वारा अलग की गयी है ।
नहरों के माध्यम से यह झील उत्तर तथा दक्षिण में तटीय झीलों से जुड़ी हुयी है ।
अनेक नदियाँ इस झील में प्रवाहित होती हैं , जैसे
- पम्बा तथा परियार । यह झील पल्लीपुरम तथा पेरूम्बलम जैसे द्वीपों को घेरे हुए है
।
वीरनपुझा झील ( Veeranpuzha Lake )
कोच्चि स्थित यह झील बेंबानद झील ( Vembnad Lake ) का उत्तरी विस्तार है । यह देश के विभिन्न भागों तथा विदेश से अनेक
पर्यटकों को आकर्षित करती है ।
वेम्बनट्टू झील ( Vembanattu Lake )
कोट्टायम से लगभग 16 कि.मी.
दूर यह नदियों तथा नहरों का एक विस्तृत जालक्रम ( नेटवर्क ) है । एक मनोहर पिकनिक
स्थल तथा तेजी से विकसित होता । यह स्थान पश्च जल पर्यटन . नौका विहार और मत्स्यन
के लिए प्रसिद्ध है । कुमाराकोम पक्षी अभयारण वेम्बानटु झील के तट पर स्थित है ।
वूलर झील ( Wular Lake )
सोपोर तथा बांदीपुर के मध्य कश्मीर घाटी में स्थित यह भारत में सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है । इस झील की उत्पनि अभिनूतन ( प्लाइस्टोसीन ) युग के दौरान विवर्तनिक क्रियाओं के कारण हुआ । मौसम के अनुसार इस झील का आकार बढ़ता - घटता है । यह झील झेलम नदी से जल ग्रहण करती तथा एक प्राकृतिक जलाशय के रूप में काम करती है । टुलबुल परियोजना ( Tulbul project ) एक ' नौसंचालन ' बाँध तथा नियंत्रण संरचना , वूलर झील के मुहाने ( मुख ) पर है । इस झील के प्राकृतिक जलाशय से नियंत्रित रूप में पानी छोड़कर जल के अभाव वाले महीनों में बारामुला तक इस नदी का न्यूनतम प्रवाह 4.5 फीट तक कायम रखता है ।

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