सोडियम ( sodium metal )



 प्राप्ति : अत्यंत ही क्रियाशील तत्व होने के कारण यह मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है । संयुक्त अवस्था में यह पर्याप्त मात्रा मे क्लोराइड , नाइट्रेट , कार्बोनेट , बोरेट और सल्फेट के रूप में पाया जाता है ।

 सोडियम धातु का निष्कर्षण : सोडियम धातु का निष्कर्षण कास्टनर विधि द्वारा द्रवित सोडियम हाइड्रॉक्साइड के वैद्युत् अपघटन से किया जाता है । डाउन विधि द्वारा भी पिघले हुए सोडियम क्लोराइड के वैद्युत् अपघटन से सोडियम धातु बड़े पैमाने पर प्राप्त की जाती है | 

सोडियम धातु के भौतिक गुण : वह चाँदी के समान सफेद धातु है । यह मुलायम होता है एवं इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है । इसका आपेक्षिक घनत्व 0.97 होता है । पानी से हल्का होने के कारण यह पानी पर तैरने लगता है । वह विद्युत् का सुचालक होता है । सोडियम धातु बेंजीन तथा ईथर में विलेय होता है ।

 सोडियम के रासायनिक गुण : साधारण ताप पर शुष्क हवा और शुष्क ऑक्सीजन का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है । आर्द्र हवा में सोडियम की सतह मलिन पड़ जाती हैं , क्योंकि उस पर सोडियम ऑक्साइड ( Na 2 O ) की सतह जम जाती है , जो जलवाष्प से संयोग कर सोडियम हाइड्रॉक्साइड का निर्माण करती है और यह सोडियम हाइड्रॉक्साइड वायु में उपस्थित CO2 से संयोग कर सोडियम कार्बोनेट ( Na 2 co 3 ) बनाता है । यही कारण है कि सोडियम धातु को   केरोसीन तेल के अन्दर डूबाकर रखा जाता है । यह जल के साथ तीव्रता से प्रतिक्रिया कर सोडियम हाइड्रॉक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस बनाता है । यह क्लोरीन गैस में जलाये जाने पर सोडियम क्लोराइड बनाता है । यह Co 2 गैस में जलाये जाने पर सोडियम कार्बोनेट बनाता है । यह अमोनिया के साथ प्रतिक्रिया कर सोडामाइड बनाता है । यह ऐल्कोहॉल के साथ प्रतिक्रिया कर सोडियम ऐल्कॉक्साइड बनाता है एवं हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है । यह अम्लों के साथ प्रतिक्रिया कर लवण बनाता है और हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है ।

सोडियम के उपयोग : 1 , अवकारक के रूप में 2. सांश्लेषिक प्रतिक्रियाओं ( synthetic reacticons ) में 3. सोडियम - लेड मिश्रधातु का उपयोग टेट्राइथाइल लेड नामक अपस्फोटनरोधी ( Anti Knocking ) यौगिक बनाने में होता है | 4. द्रवित सोडियम का उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों में ठंडक उत्पन्न करने में होता है । सोडियम के यौगिक 

1. सोडियम हाइड्रॉक्साइड ( Sodium Hydroxide ) : सोडियम हाइड्रॉक्साइड ( NaOH ) को कास्टिक सोडा ( CausticSoda ) या दाहक सोडा कहा जाता है । इसका उपयोग पेट्रोलियम को शुद्ध करने में , साबुन बनाने में . कागज . सूती कपड़ों में चमक पैदा करने में , कृत्रिम रेशम के निर्माण में , रंग तथा रेयॉन ( Rayon ) बनाने में , प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में तथा सोडियम धातु के निर्माण में होता है । 


2.सोडियम कार्बोनेट ( Sodium Carbonate ) : सोडियम कार्बोनेट ( Na 2 CO3.10H2O ) को धोने वाला सोडा या वाशिंग सोडा भी कहा जाता है । वाशिंग सोडा का बड़े पैमाने पर उत्पादन लेब्लांक विधि , सौल्वे विधि ( अमोनिया - सोडा विधेि ) तथा वैद्युत् विधि द्वारा किया जाता है । सोडियम कार्बोनेट का उपयोग जल का खारापन दूर करने में , पेट्रोलियम को शुद्ध करने में , प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में तथा शीशा , साबुन , कागज , कास्टिक सोडा आदि के उत्पादन में होता है । वाशिंग सोडा का जलीय विलयन क्षारीय होता है । क्रिस्टलीय अवस्था में वाशिंग सोडा में क्रिस्टलन जल होता है । वाशिंग सोडा में अपमार्जक का गुण होता है । 

3. सोडियम बाइकार्बोनेट ( Sodium Bicarbonate ) : सोडियम बाइकार्बोनेट का दूसरा नाम बेकिंग सोडा ( Baking Soda ) है ! सोडियम बाइकार्बोनेट ( NaHCO3) को खाने वाला सोडा भी कहते हैं । आटा में खाने वाला सोडा मिलाने पर बनी रोटी अच्छी तरह फुलती है , क्योंकि इस दौरान कार्बन डाइऑक्साइड गैस ( CO2 ) निकलती है । सोडियम बाइकार्बोनेट का उपयोग औषधि के रूप में , पेट की अम्लता ( Acidity ) दूर करने में , बेकिंग पाउडर ( Baking Pouder ) बनाने में तथा अग्निशामक यंत्रों में होता है ।


4. ग्लोबर साल्ट ( Glauber's Salt ) : सोडियम सल्फेट ( Na , SO , 10H , O ) को ग्लोबर साल्ट कहा जाता है । यह सोडियम हाइड्रॉक्साइड या सोडियम कार्बोनेट पर सल्फ्यूरिक अम्ल की प्रतिक्रिया से तैयार किया जाता है । यह एक रंगहीन तथा रवादार ठोस पदार्थ है । इसके एक अणु में रचा जल के 10 अणु उपस्थित रहते हैं । इसका उपयोग शीशा बनाने , कागज बनाने , दवा बनाने , सोडियम सल्फाइड के निर्माण आदि में होता है ।
 5. सोडियम क्लोराइड ( Sodium Chloride ) : सोडियम क्लोराइड ( NaCl ) को साधारण नमक या ( Common Salt ) कहा जाता है । समुद्री जल के बाष्पीकरण प्रक्रिया से नमक का उत्पादन होता है । सोडियम क्लोरोइड को बर्फ के साथ मिलाकर हिम - मिश्रण ( Freezing Mixture ) बनाया जाता है । सोडियम क्लोराइड मानव के भोजन का आवश्यक अंग है । समुद्री जल में कुल घुलनशील ठोस का 75 % सोडियम क्लोराइड होता है । डिहाइड्रेशन के समय शरीर में सोडियम क्लोराइड कम हो जाता है । नमक को खुली हवा में छोड़ देने पर यह हवा से नमी को सोख लेता है । इसका कारण नमक में अशुद्धि के रूप में मैग्नीशियम क्लोराइड ( MgCI . ) की उपस्थिति है , जो कि प्रस्वेदी ( Deliquence ) होता है ।
 6. सोडियम परऑक्साइड ( Sodium reroxide ) : यह हल्के पीले रंग का चूर्ण होता है । खुली हवा पर छोड़ देने पर हाइड्रॉक्साइड और कार्योनेट की तह जम जाने के कारण यह सफेद हो जाता है । इसका उपयोग हाइड्रोजन पेरॉक्साइड के निर्माण में , रंगाई के काम में , प्रयोगशाला में ऑक्सीकारक के रूप में , रेशम , ऊन आदि के विरंजन ( Bleaching ) होता है । सोडियम परऑक्साइड का उपयोग पनडुब्बी . जहाजों तथा अस्पताल आदि की बंद हवा को शुद्ध करने में भी होता है । 
7. सोडियम नाइड्रेट ( Sodium Nitrate ) : सोडियम नाइट्रेट को चिली साल्टपीटर कहते हैं । यह चीली तथा पेरू में काफी मात्रा में मिलता है । इसका उपयोग खाद के रूप में तथा नाइट्रिक अम्ल के निर्माण में होता है ।

8. सोडियम थायोसल्फेट ( Sodium Thiosulphate ) : इसका अणुसूत्र Na , S , O , 5H , O होता है । इसे हाइपों ( HYPO ) के नाम से भी जाना जाता है । इसका उपयोग फोटोग्राफी ( Photography ) में निगेटिव और पॉजिटिव का स्थायीकरण करने में होता है । यह अनअपघटित सिल्वर ब्रोमाइड को दूर कर देता है । इसका उपयोग प्रतिक्लोर ( Antichlor ) के रूप में विरंजित ( Bleached ) वस्त्रों से ( ( ) क्लोरीन दूर करने में होता है । इसका उपयोग सिल्वर ( Ag ) और गोल्ड ( Au ) के निष्कर्षण में भी होता है । 
9. बोरेक्स या सुहागा ( Borex ) : सोडियम टेट्राबोरेट डेका हाइड्रेट ( Na , BO , 10H , O ) को सुहागा या बोरेक्स कहते हैं । यह सफेद क्रिस्टलीय ठोस है । यह जल में विलेय हैं । इसके मुख्य उपयोग हैं ( a ) काँच , इनेमिल , साबुन व मोमबत्ती उद्योग में ( b ) कागज व सिरमिक की वस्तुओं पर ग्लेज करने में ( c ) जल को मृदु करने में ( d ) चमड़ा उद्योग में खोल को साफ करने व चमड़े की रंगाई में 
10.माइक्रोकॉस्मिक लवण ( Microcosmic Salt ) : सोडियम अमोनियम हाइड्रोजन फॉस्फेट को माइक्रोकॉस्मिक लवण कहते हैं । 
11. केल्गन ( Calgen ) : सोडियम हेक्सा मेटाफॉस्फेट [ Na , ( PO ) . ] को केल्गन कहते हैं । इसका प्रयोग जल की कठोरता दूर करने में किया जाता है । 

नोट : 1. नेल्सन सेल ( Nelson's Cell ) का उपयोग सोडियम हाइड्रॉक्साइड के निर्माण में किया जाता है । 2. सोडियम के लवण बुन्सेन ज्यालक की अप्रकाशमान शिखा ( Non Luminous ) को स्थायी सुनहरा पीला रंग प्रदान करते हैं । आयनन विभव ( lonisation Potential ) न्यून होने के कारण सोडियम धातु बुन्सेन ज्वाला के साथ सुनहरा पीला रंग देता है ।



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