2014 के आंकड़ों के
अनुसार भारत में 47 बाघ आरक्षित
क्षेत्र हैं । इनमें से कुछ बाघ आरक्षित क्षेत्रों ( Tiger Reserves ) का वर्णन निम्न में दिया गया है ।
1. भद्रा बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Bhadra Tiger
Reserve ) : कर्नाटक में स्थित
इस संरक्षित प्रदेश की स्थापना 1998 में हुई । यह 500 वर्ग कि.मी. के क्षेत्रफल में फैला हुआ
है । बाघों के अतिरिक्त यहाँ तेंदुएँ , हाथी , भालू , लंगूर , बंदर तथा विभिन्न प्रजाति के पक्षी देखे जा सकते हैं ।
2. बांधवगढ़ बाघ संरक्षित
प्रदेश ( Bandhavgarh
Tiger Reserve ) : यह संरक्षित श्रण्य मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित
है । इसका क्षेत्रफल 105 वर्ग कि.मी. है ।
इसकी स्थापना 1968 में की गई । यह एक
लघु किन्तु सघन राष्ट्रीय उद्यान है । सफेद बाघ ( White tiger ) पाए जाने के कारण इसे ' सफेद बाघ का देश ' भी कहा जाता है ।
3. बांदीपुर बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Bandipur Tiger
Reserve ) : यह भारत का एक
प्रसिद्ध बाघ संरक्षित प्रदेश तथा अभ्यारण्य है । यह दक्षिण कर्नाटक में स्थित है
तथा नीलगिरि जीवमंडल संरक्षित प्रदेश ( Biosphere Reserve ) का भाग है । यह लगभग 70 बाघों तथा तीन हजार एशियाई हाथियों का
वास स्थान है । इसके अतिरिक्त यहाँ तेंदुएँ , ढोल , गौर तथा रीछ पाए
जाते हैं । इस संरक्षित प्रदेश का यूनेस्को ( UNESCO ) द्वारा वल्ड हेरीटेज साइट के रूप में चयन
विचाराधीन है ।
4. बेतला बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Betla Tiger
Reserve ) : छोटानागपुर पठार
में स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान झारखंड राज्य के पलामू जिले के अन्तर्गत आता है ।
यह 1025 वर्ग कि.मी. के
क्षेत्र में फैला हुआ है । बेतला उन अग्रणीय राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है जो ' प्रोजेक्ट टाइगर ' ( Project Tiger ) योजना के अन्तर्गत
बाघ संरक्षित प्रदेश बना । यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में वन उल्लू , अंगारक , बाघ , गन्धविलाव तथा
बंदर मुख्य हैं । इस संरक्षित प्रदेश में हाथियों की सवारी की सुविधा प्रदान की
जाती है ।
5. बोरी - सतपुड़ा
पेंच ( Bori Satpura
Pench ) : यह बाघ संरक्षित
प्रदेश मध्य प्रदेश में स्थित है तथा 1486 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में फैला हुआ है । बाघ के अतिरिक्त
यहाँ तेदुएँ , हाथी , चीतल , लंगूर नीलगाय , गौर , भालू तथा बनैला
सूअर पाए जाते हैं ।
6. बुक्सा बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Buxa Tiger
Reserve ) : यह राष्ट्रीय
उद्यान उत्तरी बंगाल के बुक्सा पहाड़ियों में स्थित है । यह उद्यान भूटान के निकट 760 वर्ग कि . मी . के क्षेत्रफल में फैला
हुआ है । इस संरक्षित प्रदेश में पाए जाने वाले जानवर हैं . गन्धविलाव , तथा जंगली मुर्गे - मुर्गियाँ ।
7. डम्फा बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Dampha Tiger
Reserve ) : गह संरक्षित
प्रदेश मिजोरम के पहाड़ी इलाके में स्थित है तथा इसकी स्थापना 1994 में की गई थी । यह 500 वर्ग कि.मी. के क्षेत्रफल में फैला हुआ
है । बाघ के अतिरिक्त यहाँ हाथी , तेंदुआ , रीछ तथा हिरण पाए जाते हैं ।
8. बुधवा बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Dudhwa Tiger
Reserve ) : 490 वर्ग कि.मी.
क्षेत्रफल में फैले इस श्रण्य ( Sanctuary ) की स्थापना एक
वन्य जीव अभयारण्य के रूप में 1958 में हुई तथा इसे 1988 में एक बाघ संरक्षित प्रदेश बनाया गया ।
यह हिमालय की तराई में नेपाल की सीमा तथा उत्तर प्रदेश में स्थित है । यह बाघों , चिड़ियाघर में
जन्में बाघों तथा दलदल में पाए जाने वाले हिरनों का अभयारण्य है । 1980 में इस संरक्षित प्रदेश में असम से गैंडे
लाए गए थे । यह उद्यान -बाघ , पक्षियों के मामले में धनी है . यहाँ पक्षियों को लगभग 350 प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिसमें दलदल में
पाए जाने वाले तीतर , कठफोड़वा तथा चरत
शामिल हैं ।
9. गिर बाघ संरक्षित
प्रदेश ( Gir Tiger
Reserve ) : यह अण्य ' ससन गिर ' के नाम से भी जाना जाता है तथा यह विशुद्ध एशियाई शेर ( Parthera leo persica ) का एकमात्र वास -
स्थान है । यह पूर्ण रूप से संरक्षित प्रदेश ( राष्ट्रीय उद्यान ) के लिए 258 वर्ग कि.मी. में फैला हुआ है तथा
अभयारण्य के लिए 1153 वर्ग कि.मी. के
प्रदेश में फैला हुआ है । यह एशिया का एक महत्वपूर्ण संरक्षित प्रदेश है । यह
काठियावाड़ प्रायद्वीप में जूनागढ़ से 65 कि.मी , दक्षिण - पूर्ण
में स्थित है । 2005 की गणना के अनुसार
यहाँ 359 शेर हैं ।
10. इन्द्रावती बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Indravati Tiger
Reserve ) : यह संरक्षण
क्षेत्र छत्तीसगढ़ के डाडेवाला जिले में स्थित है । इसका नाम निकटवर्ती इन्द्रावती
नदी के नाम पर रखा गया है । यह दुलर्भ जंगली भैसों का वासस्थान है तथा दलदल में
पाए जाने वाले हिरनों का भी एक वैकल्पिक वासस्थान है ।
11. जिम कार्बेट बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Jim Corbett
Tiger Reserve ) : कुमाऊँ हिमालय के पादगिरि में स्थित यह संरक्षित प्रदेश
लगभग 521 वर्ग कि.मी.
क्षेत्र में फैला हुआ है । यह भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है । पहले यह
हेली राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता था . इसे जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान
एवं संरक्षित प्रदेश का नाम 1957 में दिया गया ।
यहाँ बाघ , हाथी , चीतल , सांभर , नीलगाय , घड़ियाल , नागराज , बनैला सूअर , छछूदर , उड़नेवाली लोमड़ी तथा धुंधले रंग का लंगूर पाया जाता है , इसके अतिरिक्त यहाँ पक्षियों की 600 प्रजातियाँ पाई जाती हैं ।
12. कान्हा बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Kanha Tiger
Reserve ) : यह मध्य प्रदेश के
माँडला तथा बालाघाट जिले में स्थित है । इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1955 में की गई थी । यह 1000 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में फैला हुआ है ।
इस उद्यान में हिरन , बनैला सूअर , नीलगाय तथा पक्षियों की अनेक प्रजातियाँ
भी पाई जाती हैं ।
13. मानस बाघ संरक्षित
प्रदेश ( Manas Tiger
Reserve ) : मानस राष्ट्रीय
उद्यान यूनेस्को ( UNESCO ) द्वारा घोषित एक ' वल्र्ड हेरीटेज साइट ' ( World Heritage Site ) है . यह प्रोजेक्ट
टाइगर रिजर्व ' तथा एक ' एलिफैन्ट रिजर्व ' भी है । यह असम का एक जीवमंडल संरक्षित
प्रदेश भी है जो हिमालय के पादगिरि में स्थित है तथा इसके एक भाग का विस्तार भूटान
तक है । यह उद्यान दुर्लभ तथा विलुप्त होते जा रहे वन्य जीव के लिए प्रसिद्ध है जो
विश्व में और कहीं नहीं पाए जाते हैं , जैसे - असम रूफ्ट टर्टल . हिसपिड हेअर . सुनहला लंगूर तथा
जंगली सूअर ।
14. मेलघाट बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Melghat Tiger
Reserve ) : महाराष्ट्र के इस
बाघ संरक्षित प्रदेश की स्थापना 1973 में की गई । यह 1677 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में फैला हुआ है ।
यहाँ बाधों के अतिरिक्त तेंदुआ , भालू , हाथी , लंगूर , बंदर , चीतल . हिरन तथा विभिन्न प्रजाति के
पक्षी पाए जाते हैं ।
15. मुंडनथुरिया -
कालाकड बाघ संरक्षित प्रदेश ( Mundanthuria - Kalakad Tiger Reserve ) : 1988 में स्थापित तमिलनाडु का यह बाघ संरक्षित
प्रदेश लगभग 800 वर्ग कि.मी. के
प्रदेश में फैला हुआ है । यहाँ बाघ , हाथी , तेंदुआ , बंदर , लंगूर , अजगर , चीतल , हिरन तथा विभिन्न प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं ।
16. नागार्जुन सागर
बाघ संरक्षित प्रदेश ( Nagarjun Sagar
Tiger Reserve ) : नागार्जुन सागर बाँध ( तेलंगाना ) के निकट स्थित इस बाघ
संरक्षित प्रदेश की स्थापना 1982 में की गई थी । यह
3568 वर्ग कि.मी. के
क्षेत्रफल में फैला हुआ है । बाघ के अतिरिक्त यहाँ हाथी , सांभर , चीतल , नील गाय , लंगूर तथा बंदर पाए जाते हैं । यहाँ
पक्षियों की अनेक प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं ।
17. नामधापा बाघ संरक्षित
प्रदेश ( Namdapha Tiger
Reserve ) : म्यांमार की सीमा
के निकट यह ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर अरूणाचल प्रदेश में स्थित है । यह एक पक्षी
अभयारण्य ( Sanctuary ) तथा एक बाघ
संरक्षित प्रदेश है । तेंदुआ , बाघ , सफेद पंखों वाले वुड डक ( Wood Duck ) तथा हुलॉक गिवन ( ऊलक ) यहाँ पाए जाने वाले मुख्य
जानवर है । भारत में लोसू जनजाति का आखिरी गाँव इस उद्यान में स्थित है ।
18. पखुई - मामेरी बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Pakhui Nameri
Tiger Reserve ) : यह संरक्षित प्रदेश अरुणाचल प्रदेश तथा असम को सीमा पर
स्थित है । यह 1200 वर्ग कि.मी. के
क्षेत्रफल में फैला हुआ है । यहाँ हाथी . तेदुआ . मगरमच्छ , बंदर , हिरण तथा विभिन्न प्रजाति के पक्षी पाए जाते हैं ।
19. पन्ना बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Panna Tiger
Reserve ) : वह राष्ट्रीय
उद्यान मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है । यह चोतल , चिंकारा , सांभर तथा रीछ का वास स्थान है यह एक बाघ संरक्षित प्रदेश
भी है इस उद्यान 200 से अधिक पक्षियों
की प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिसमें चार हेडेड गूस ' , ' हनी बर्डस ' , राजगिद्ध ( King Vulture ) तथा टुइयाँ तोता ( Blossom Headed Parakeet ) शामिल हैं ।
20. पेंच बाघ संरक्षित
प्रदेश ( Pench Tiger
Reserve ) : यह संरक्षित
प्रदेश मध्य प्रदेश के सिवनी तथा जिंदवाड़ा जिले में स्थित है । इसकी स्थापना 1998 में की गई थी । इसका नाम पेंच नदी के नाम
पर रखा गया है , जो इस उद्यान से
होकर गुजरती है । यहाँ बाघ , चीतल . सांभर , नीलगाय , बनैला सूअर , तेंदुआ , रोछ , जंगली कुत्ता , वनबिलार , लोमड़ी , सियार , लकड़बग्घा , गौर , चौसिंगा तथा काकड़ पाए जाते हैं । इनके अतिरिक्त यहाँ अनेक
प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं ।
21. पेरियार बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Periyar Tiger
Reserve ) : यह केरल में पेरियार
नदी के निकट स्थित है तथा इसकी स्थापना 1978 में की गई थी । यहाँ बाघ , हाथी , तेंदुआ , बंदर . लंगूर , चीतल , हिरन तथा अनेक प्रजाति के पक्षी पाए जाते हैं ।
22. रणथम्भौर
राष्ट्रीय उद्यान ( Ranthambore
National Park ) : राजस्थान के दक्षिण - पूर्व में स्थित यह उद्यान सवाई
माधोपुर जिले के अन्तर्गत आता है । इस उद्यान को बनस नदी धेरै हुए है । यहाँ बाघ , तेंदुआ , सांभर , चीतल , गौर , नीलगाय , जगली सुअर , तथा पक्षियों की विभिन्न प्रजातियाँ देखी
जा सकती हैं ।
23. सरिस्का बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Sariska Tiger
Reserve ) : यह राजस्थान के
अलवर जिले में स्थित है । इसकी स्थापना 1955 में की गई तथा 1978 में इसे एक बाघ संरक्षित प्रदेश घोषित किया गया । यहाँ
तेंदुआ , वनबिलार , लकड़बग्घा , सियार , चीतल , सांभर , कैरकैल , लंगूर , बनैला सूअर तथा
चौसिंगा पाए जाते हैं । यहाँ पक्षियों की भी विभिन्न प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं
। यहाँ बादशाह औरंगजेब तथा अलवर के राजा द्वारा निर्मित ऐतिहासिक इमारतें मौजूद
हैं ।
24. सिमलीपाल बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Simlipal Tiger
Reserve ) : यह राष्ट्रीय
उद्यान उड़ीसा के मयूरभंज जिले में स्थित है । यहाँ सेमल के वृक्ष ( Silk Cotton Tree ) पाए जाते हैं ।
यहाँ कुछ दर्शनीय जल प्रपात हैं जैसे जोरंडा तथा बारेहीपानी । यह उद्यान बाघ , गन्धविलाव , हाथी , सियार तथा ' ब्लैक बक ' के लिए प्रसिद्ध
है ।
25. सुंदरवन बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Sundarban Tiger
Reserve ) : यह पश्चिम बंगाल
के सुंदरवन डेल्टा में स्थित है । यह एक बाघ संरक्षित प्रदेश , यूनेस्को ( UNESCO ) द्वारा घोषित वर्ल्ड हेरीटेज साइट ( World Heritage Site ) तथा एक जीवमंडल
संरक्षित प्रदेश है । यहाँ सघन मैनग्रोव ( Mangrove ) वन देखे जा सकते जाते हैं । हैं । यहाँ विभिन्न प्रकार के
पक्षी तथा मगरमच्छ पाए
26. तदोबा - अंधेरी
बाघ संरक्षित प्रदेश ( Tadoba -
Andheri Tiger Reserve ) : महाराष्ट्र का यह बाघ संरक्षित प्रदेश 1993 में स्थापित हुआ । यह 620 वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल में फैला हुआ है ।
यहाँ बाघ , हाथी , तेंदुआ , बंदर , चीतल तथा विभिन्न
प्रजाति के पक्षी पाए जाते हैं ।
27. वाल्मिकी बाघ
संरक्षित प्रदेश ( Valmiki Tiger
Reserve ) : यह राष्ट्रीय
उद्यान बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले में स्थित है तथा 840 वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल में फैला हुआ है ।
बाघ के अतिरिक्त यहाँ पाए जाने वाले मुख्य जानवरों में गन्धविलाव , जंगली कुत्ता , सियार , लोमड़ी तथा बनैला सूअर मुख्य हैं । इस उद्यान में पक्षियों
की विभिन्न प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं ।
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