आशी राष्ट्रीय उद्यान ( Anshi National Park ) :

आंशी राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक के उत्तरी कनड़ जिले में गोवा के निकट स्थित है । इसका विस्तार 340 वर्ग कि.मी. है तथा यह दांडेली वन्य जीव अभ्यारण्य ( Sanctuary ) के निकट  स्थित है । इस उद्यान में अन्य वन्य जीवों के अतिरिक्त साँवले तेंदुएँ , बाघ तथा हाथी पाए जाते हैं । वृक्षों में बास , दालचीनी ( Cinnamon ) , रजत - देवदार तथा जम्बा प्रमुख हैं ।

बालपाखरम राष्ट्रीय उद्यान ( Balpakram National Park ) :

 यह राष्ट्रीय उद्यान समुद्री स्तर से 3000 मीटर को ऊँचाई पर मेघालय के गारो पहाड़ियों में स्थित है । इसे प्रायः ' चिरस्थायी पवन का वास ' और ' भूत - प्रेतों की भूमि ' ( Land of Spirits ) कहा जाता है । यह हाथी काकड ( Barking deer ) , बबून ( baboons ) , सुनहरी बिल्ली ( Golden cat ) . लाल पाण्डा , जंगली भैस तथा अनेक बंदरों का वासस्थान है । वनस्पती में उष्ण पतझड़ वृक्ष प्रमुख हैं ।

बन्नेर घाटा राष्ट्रीय उद्यान ( Bannerghatta National Park ) :

यह उद्यान 25,000 एकड़ ( 101 वर्ग कि.मी. ) बंगलौर दक्षिण में स्थित है । यह एक पहाड़ी प्रदेश है जिसमें एक धनी प्राकृतिक जन्तुशाला है । यह उद्यान बंगलौर का एक मुख्य पर्यटन आकर्षण है ।

भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान ( Bhittarkanika National Park ) :

यह उद्यान उड़ीसा के केन्द्रपाड़ा जिले में स्थित है , जो 145 वर्ग कि.मी. में ब्राह्मनी तथा बैतरनी नदियों के डेल्टा में फैला हुआ है । इस राष्ट्रीय उद्यान में मगरमच्छ , सफेद मगरमच्छ , कछुआ , अजगर तथा डार्टर पाए जाते हैं । इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1975 में की गई ।

ब्लैकबक राष्ट्रीय उद्यान ( Blackbuck National Park ) :

यह राष्ट्रीय उद्यान गुजरात के भावनगर जिले में स्थित है । इसकी स्थापना 1976 में की गई तथा यह भावनगर शहर से लगभग 75 कि.मी. की दूरी पर स्थित है । खम्भात की खाड़ी के दक्षिण में इसके तट पर यह 34 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में फैला हुआ है । यह राष्ट्रीय उद्यान काले हिरण ( Black buck ) , तिलोर , सोहन चिड़िया ( bustard ) तथा भेड़िया का प्राकृतिक वासस्थान है । यहाँ तिलोरों की सबसे अधिक संख्या है ।

 

 कैम्पबेल राष्ट्रीय उद्यान ( campbell national park ) :

यह उद्यान 425 वर्ग कि.मी. के क्षेत्र पर फैला हुआ है । यह ग्रेट निकोबार द्वीप में स्थित है , जो निकोबार द्वीपों में सबसे बड़ा द्वीप है ।

इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1992 में की गई तथा यह ग्रेट निकोबार बायोस्फेयर रिजर्व का भाग है ।

चांदोली राष्ट्रीय उद्यान ( Chandoli National Park ) :

यह  राष्ट्रीय उद्यान वर्ष 2004 में स्थापित किया गया जो 320 को कि.मी. क्षेत्र में फैला हुआ है । यह चन्दोली बांध के निकट . महाराष्ट्र के सांगली जिले में स्थित है । यहाँ हाथी , बंदरअजगर , उल्लू तथा जंगली सुअर ' वाइल्ड बोर ' पाए जाते हैं ।

डाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान ( Dachigam National Park ) :

यह श्रीनगर शहर से लगभग 20 कि.मी. की दूरी पर स्थित है । यह लगभग 140 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में फैला हुआ है । इस उद्यान के नाम का शाब्दिक अर्थ है ' दस गाँव ' । यद्यपि यह उद्यान 1910 से ही एक सुरक्षित प्रदेश था परन्तु उसे 1981 : में एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया । यहाँ हंगुल ( लाल हिरन ) , कश्मीरी हिरण , हिमालय में मृग , कस्तूरी मृग , तेंदुआ तथा कुक्कुट पाए जाते हैं । हंगुल तेंदुओं की संख्या में वृद्धि के कारण हंगुल की संख्या घटती जा रही है ।

मरूस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान ( Desert National Park ) :

यह उद्यान 3165 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में फैला हुआ है तथा जैसलमेर शहर ( राजस्थान ) के निकट स्थित है । इस उद्यान की स्थलाकृति की विशेषता रेत के टीले , चट्टानी शैल इत्यादि हैं । यह उद्यान विलुप्त होते सोहन चिड़ियों ( Great Indian Bustards ) , शिकारी कुत्तों , बाज , टीसा ( buzzards ) , गिद्ध , विभिन्न प्रकार के गरूड़ इत्यादि का वास स्थान है । छोटे तलाबों तथा झीलों के निकट रेत के टीले देखे जा सकते हैं । यह उद्यान थार मरूस्थल के पारिस्थितिक तंत्र का एक अच्छा . उदाहरण है । इस राष्ट्रीय उद्यान को देखने का उपयुक्त समय नवम्बर तथा जनवरी के बीच है ।

डिब्रू - साइखोवा राष्ट्रीय उद्यान ( Dibru - Saikhowa National Park ) : 

यह राष्ट्रीय उद्यान तिनसुकिया ( असम में स्थित है । इस उद्यान का विस्तार 650 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में है । इस उद्यान की स्थापना ' विग्ड बुड डक ' , जंगली घोड़े , जल भैंसा , बाघ तथा ' कैप्ट ' लंगुर को सुरक्षित रखने के लिए की गयी थी ।

इरावीकुलम राष्ट्रीय उद्यान ( Eravikulam National Park ) :

यह उद्यान लगभग 100 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में फैला हुआ है । यह पश्चिमी घाट के नजदीक केरल के इडुक्की जिला में स्थित है । यह शोला राष्ट्रीय उद्यान नजदीक है तथा इस उद्यान का प्रशासन केरल वन तथा वन्य जीव विभाग के हाथों में हैं । इस उद्यान का यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थान के रूप में चयन विचाराधीन है ।

फॉसिल ( जीवाश्म ) राष्ट्रीय उद्यान ( Fossil National Park ) : 

मध्य प्रदेश के मांडला जिले में स्थित इस उद्यान में उन वनस्पतियों के जीवाश्म है , जो 150 मिलियन वर्ष पहले से लेकर 40 मिलियन वर्ष पहले तक पाए जाते थे । यह उद्यान सात गाँवों में फैला हुआ है तथा इसका कुल प्रदेशफल 275,000 वर्ग मीटर है ।

गालाथिया राष्ट्रीय उद्यान ( Galathea National Parky ) :

1992 में राजपत्रित यह राष्ट्रीय उद्यान अंडमान तथा निकोबार केन्द्र शासित प्रदेश में स्थित है । यह ग्रेट निकोबार बायोस्फोयर रिजर्व का एक भाग है , जिसमें कैम्पवेल राष्ट्रीय उद्यान भी शामिल है ।

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान ( Gangotri National Park ) :

 यह उद्यान उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है । यह 1530 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में फैला हुआ है । इस उद्यान में भव्य हिमानी दृश्य , कोणधारी वन तथा हरे घास के मैदान का मिश्रण देखा जा सकता है ।

गोरूमारा राष्ट्रीय उद्यान ( Goramara Naitonal Park ) :

 यह राष्ट्रीय उद्यान पश्चिम बंगाल के तराई प्रदेश में स्थित है । इसकी विशेषता घास के मैदान तथा वन हैं । यह मुख्य रूप से गैंडा ( इडियन रिनोसारस ) के लिए प्रसिद्ध है ।

गोविन्द पशु विहार ( Govind Pashu Vihar ) ;

यह वन्य जीव अभयारण्य उत्तरकाशी ( उत्तराखंड ) में स्थित है । एक हजार वर्ग कि.मी. के प्रदेश में फैले हुए इस अभयारण्य की स्थापना 1955 में की गई । भारतीय सरकार ने गोविन्द पशु विहार में साह योजना ( Snow Leopad Project ) की शुरूआत की । इस प्रदेश में पाए जाने वाले अन्य जीव हैं - काला भालू , भूरा भालू , तेंदुआ , गरूड़ , गिद्ध , सेराव , बर्फीले प्रदेशों में पाया जाने वाला मुर्गा , इत्यादि ।

दीर्घ हिमालय राष्ट्रीय उद्यान ( Great Himalayan National Park ) :

कुल्लु घाटी में स्थित इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1984 में की गई थी । 1500 से 6000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह उद्यान 1170 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में है । यह उद्यान 375 प्रकार के जीवों का वासस्थान है , जिसमें स्तनधारी जीव , पक्षी , सरीसृप ( Reptiles ) उभयचर KAmphibians ) , ऐनेलिड , मोलस्क तथा कीड़े पाए जाते हैं ।

गुगामल राष्ट्रीय उद्यान ( Gagamal Naitenal Park ) :

 महाराष्ट्र के अमरावती जिले में स्थित इस उद्यान की स्थापना 1974 में की गई थी । इस उद्यान का प्रदेशफल 1675 वर्ग कि.मी. है ।

गिन्डी राष्ट्रीय उद्यान ( Gnindy National Park ) :

चेन्नई में स्थित यह उद्यान भारत का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है । यह तमिलनाडु के राज्यपाल के सरकारी निवास के निकट फैला हुआ है । इस उद्यान में मनोरम वन , झाड़ियाँ , झीलें तथा छोटी धाराएँ देखी जा सकती हैं ।

समुद्रीय ( मैरिन ) राष्ट्रीय उद्यान ( Marine National Park ) :

इस उद्यान की स्थापना 1982 में की गई । गुजरात के जामनगर जिले में स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान 460 वर्ग मील के प्रदेश में फैला हुआ है । इस संरक्षित उद्यान कच्छ को खाड़ी में स्थित एक द्वीपसमूह शामिल है , जिसमें कुल 42 द्वीप हैं । इस उद्यान में प्रवाल ( Coral ) . समुद्री गाय , समुद्री कछुआ , प्रवासी पक्षी , इत्यादि पाए जाते हैं । इसके अलावा यहाँ घने मैन्ग्रोव वन ( कच्छ वनस्पति ) देखे जा सकते हैं । -

हेमिस राष्ट्रीय उद्यान ( Hemis National Park ) :

 यह राष्ट्रीय उद्यान पूर्वी लद्दाख में स्थित है । यह इस प्रदेश में सबसे बड़ा - अधिसूचित संरक्षित उद्यान है । इस उद्यान में स्तनधारी जीवों की । विभिन्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं जो विलुप्त होती जा रही हैं । - यह उद्यान सिन्धु नदी के किनारे स्थित है । यह साह ( Snow -Leopard ) , लिआँग , तिब्बतीय हिरन एवं अनेक प्रकार के पक्षियों का वास स्थान है । यह उद्यान मध्य जून से मध्य अक्टूबर के बीच ट्रेकिंग के लिए अनेक मार्ग प्रदान करता है । ।

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय उद्यान ( Indira Gandhi National ) :

 यह राष्ट्रीय उद्यान कोयम्बटूर जिले में अन्नामलाई पहाड़ियों में स्थित है । 560 वर्ग कि.मी. के प्रदेश में फैला  हुआ यह उद्यान नीलगिरि बायोस्फेयर रिजर्व ( जीवमंडल मा संरक्षित प्रदेश ) का भाग है । यह उद्यान पश्चिमी घाट के विश्व धरोहर स्थान ( World Heritage Site ) के रूप में यूनेस्को ( UNESCO ) द्वारा विचाराधीन है ।

इनटाकि राष्ट्रीय उद्यान ( Intaki National Park ) :

यह की राष्ट्रीय उद्यान नागालैंड में स्थित है । इस उद्यान में रहने में वाले वन्य जीव हैं - हुकलुक - गिबन ( ऊलक ) , ब्लैक स्टॉक  ( सुरमल ) , बाघ तथा स्लोथ बेअर ( रीछ ) ।

 

कालेश्वर वन्य जीव अभ्यारण्य ( Ksleshwar Wad Life Sanctuary ) :

हरियाणा में स्थित वह संक्षित प्रदेश चंडीगढ़ से लगभग 150 कि.मी. की दूरी पर है । यह पक्षी निरीक्षण का एक प्रसिद्ध स्थान है । यह अन्य पक्षियों के अतिरिक्त लाल मुर्गे - मुर्गियाँ का भी वासस्थान है । वर्तमान में यह एक राष्ट्रीय उद्यान नहीं है । यह हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में बने सिम्बलबारा वन्य जीव अभयारण्य का एक विस्तार है , वह अभयारण्य यमुना नदी के पार स्थित है ।

कांगर घाटी राष्ट्रीय उद्यान ( Kangar Ghati National Parky ) :

यह राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कोलाबा नदी के निकट स्थित है । यहाँ हिरन , जंगली सुअर , जंगली भैंस , नीलगाय तथा कई प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं ।

कासु ब्रह्मानंदो रेड्डी राष्ट्रीय उद्यान ( Kasu Brahmanand Ready National Park ) :

यह राष्ट्रीय उद्यान हैदराबाद के जुबली पहाड़ियों के बीच स्थित है । इस उद्यान का नाम आध प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री कासु ब्रह्मानन्द रेड्डी के नाम पर है । इस उद्यान में 600 वनस्पति की प्रजातियाँ एवं विभिन्न प्रकार की तितलियाँ तथा सरीसृप पाए जाते हैं ।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान ( Kaziranga National Park ) :

असम के गोलाघाट तथा नागाँव जिलों में फैला यह उद्यान एक ' वर्ल्ड हेरीटेज साइट ' ( अन्तर्राष्ट्रीय धरोहर ) है तथा विश्व के लगभग दो - तिहाई एक सींग वाले राइनोसरस ( गैंडे ) को आबादी इस उद्यान में है । काजीरंगा में विश्व के बाघों की सबसे घनी आबादी है तथा इसे 2006 में एक टाइगर रिजर्व घोषित किया गया । इस उद्यान में प्रजनन करने वाले हाथियों , जल भैसों , दलदल में पाए जाने वाले हिरनों तथा पक्षियों की विभिन्न प्रजाति की बड़ी संख्या है । इस उद्यान की विशेषता यहाँ के लम्बे ' एलिफैन्ट ग्रास ' ( घास ) हैं । इस उद्यान को ब्रह्मपुत्र नदी घेरे हुए है । काजीरंगा के स्थलाकृत्ति में अनावृत बालू - भित्ति , नदियों में आए बाढ़ से बने झील जिसे ' बील कहते हैं तथा उत्थापित प्रदेश ( चापोरी ) जो बाढ़ के दौरान पशुओं का आश्रय होता है , देखे जा सकते हैं । कई कृत्रिम चापोरी ( Chapories ) का निर्माण भारतीय सेना की मदद से पशुओं की सुरक्षा के लिए किया गया है ।

काइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान ( Kaibul Lamjao Nationa Park ) :

 यह मणिपुर में लोकटक झील के दक्षिण - पूर्वी प्रदेश में स्थित है । यह मणिपुर के ब्रो एंटलर्ड हिरन का आखिरी प्राकृतिक आश्रय है , इस हिरन का स्थानीय नाम सांगाई है - मणिपुर का नाचने वाला मृगा यह अन्य सकटापन्न प्रजातियों का भी वासस्थान है जिसमें अजगर शामिल है । वर्तमान में यह उद्यान लोकटक जल - विद्युत परियोजना के कारण संकट में है ।

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान ( Keoladeo National Park ) :

यह राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित है । यह पक्षियों का एक प्रसिद्ध अभ्यारण्य ( Sanctuary ) है जहाँ पक्षियों की अत्यन्त दुलर्भ तथा विलुप्त होती प्रजाति पायी जाती हैं , जैसे साइबेरियन क्रेन । साइबेरियन क्रेन यहाँ शीत ऋतु में आते हैं । इस उद्यान में 230 प्रजातियाँ पाई जाती हैं । यह एक मुख्य पर्यटक केन्द्र भी है जहाँ शीतकाल में अधिक मात्रा में पक्षीविज्ञानी आते हैं । यह एक ' वर्ल्ड हेरीटेज साइट ' ( अन्तर्राष्ट्रीय धरोहर ) है , जिसे 1971 में एक अभ्यारण्य घोषित किया गया । यह रडी शेल डक , गुल , नोर्दन पिन - टेल्स , शवलर्स , टिकरी ( कूट ) , गागैने , टफ्टेड डक तथा पोचर्ड का भी वास स्थान है ।

कनचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान ( Kachenjunga National Park ) : 

यह एक राष्ट्रीय उद्यान तथा एक जीवमंडल संरक्षित प्रदेश भी है , जो सिक्किम राज्य के उत्तरी जिले में स्थित है । इस उद्यान का कुल क्षेत्रफल लगभग 850 वर्ग कि.मी. है । इस उद्यान में कई हिमनदें हैं , जैसे - जेमू हिमनद ( Zemu Glacier ) | यह कस्तूरी मृग , साह ( Snow Leopard ) , हिमालयन् टार तथा भूरे भालूओं का वास स्थान है ।

किस्तवाड़ राष्ट्रीय उद्यान ( Kishtwar National Park ) :

 यह राष्ट्रीय उद्यान जम्मू एवं कश्मीर राज्य के जम्मू प्रखंड के डोडा जिले में स्थित है । यह उद्यान भूरे भालू तथा बर्फीले प्रदेशों में पाए जाने वाले मुर्गे - मुर्गियों का वासस्थान है ।

कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान ( Kudermukh National Park ) :

कुद्रेमुख कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में एक पर्वत है । शाब्दिक रूप में इसका अर्थ ' घोड़े का चेहरा ' है । यह मूल रूप से ' लोहे अयस्क ' का निक्षेप है । यह प्रदेश वन्य जीवों के मामले में धनी है । तुंगभद्रा तथा नेत्रावती जैसी महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम स्थान कुद्रेमुख में है । यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में मालाबार के गन्धबिलाव ( civet ) , जंगली कुत्ते , रीछ ( sloth bear ) तथा चीतल ( spotted dear ) शामिल हैं ।

 माधव राष्ट्रीय उद्यान ( Madhav National Park ) : 

यह राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित है । शिवपुरी ग्वालियर के सिन्धिया शासकों की ग्रीष्मकालीन राजधानी था । इससे पहले इसके जंगलों में मुगल शासक शिकार करते थे । 1564 में मांडु से लौटते हुए मुगल बादशाह अकबर ने शिवपुरी य के जंगलों से अपने अस्तबल के लिए हाथियों के एक झुंड को पकड़ा था । राष्ट्रीय उद्यान का भू - भाग विभिन्नताओं से भरा है जैसे वनों से ढके पर्वत तथा झीलों के किनारे समतल घास के मैदाना । यह प्रदेश जैव विविधता के मामले में धनी है 

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